आठ महीने में बार बार शिक्षा निदेशालय अपने निर्णय से पलटा है, पहले भी आदेशों पर विरोध होने पर विभाग बैकफुट पर आता दिखा है।
बीकानेर, शिक्षा निदेशालय ने मंगलवार को तीन तबादला आदेशों में सरकारी स्कूलों के 40 प्राचार्य सहित 53 शिक्षकों के तबादला आदेश जारी कर तीन घंटे के अंदर ही आदेश प्रत्यहारित कर लिए। ऐसा बीते आठ महीने में आठवीं बार शिक्षा निदेशालय अपने निर्णय से बैकपुट पर आया है।
ये तबादला आदेश मंगलवार को 11 बजे वायरल होने शुरू हुए। इसके बाद मंत्री किरोड़ीलाल मीणा का शिक्षा मंत्री को भेजा पत्र भी वायरल होने लगा, जिसमें तबादला आदेश वापस लेने की अपील की गई थी। इसके असर से शिक्षा निदेशालय ने दोपहर 1 बजे तीनों तबादला आदेश वापस लेने की घोषणा कर दी।
आठ महीने में आठवीं बार पलटा अपना निर्णय
1. शिक्षकों का समायोजन :
प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में अधिशेष 67 हजार शिक्षकों के समायोजन के लिए 18 सितंबर से प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी किए गए। कई जिला शिक्षा अधिकारियों ने इस पर काम भी शुरू कर दिया था लेकिन बाद में इस आदेश को प्रत्यहारित कर लिया गया।
2. प्रवेश की आयु :
प्रवेशोत्सव से पहले नई शिक्षा नीति का हवाला देकर शिक्षा विभाग ने 6 साल के बच्चों को ही विद्यालयों में प्रवेश देने के आदेश जारी किए, जिससे सरकारी विद्यालयों में नामांकन की रफ्तार थम गई। शिक्षकों ने इस आदेश का विरोध किया तो शिक्षा विभाग ने फैसला बदला और आंगनबाड़ी के पांच साल के बच्चों को प्रवेश देने का संशोधन कर दिया।
3. 100 दिन की कार्य योजना पर कायम नहीं :
पिछले साल नवंबर में भाजपा सरकार बनने के बाद शिक्षा विभाग ने 100 दिन की कार्ययोजना तैयार जय थी जिसमें शिक्षकों की तबादला नीति तैयार करने को भी शामिल किया गया था लेकिन कुछ दिन बाद कार्ययोजना में संशोधन कर तबादला नीति वाली प्रतिबद्धता हटा दी गयी।
4. विद्यालयों को अंग्रेजी से हिंदी माध्यम :
शिक्षा मंत्री के बयान के बाद शिक्षा विभाग ने महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों की समीक्षा करने के निर्देश जारी किए जिसके लिए 38 बिंदुओं पर सर्वे भी करवाया गया था लेकिन कुछ समय बाद अंग्रेजी से वापस हिन्दी माध्यम में करने के अपने निर्णय से पीछे हट गए।
5. दूध योजना बंद कर पुन: चालू कर दी गयी :
नए शिक्षा सत्र से सरकारी विद्यालयों में पाउडर दूध की आपूर्ति बंद पड़ी थी। शिक्षा मंत्री ने सितम्बर में गहलोत सरकार के समय से चल रही बाल गोपाल दूध योजना में बदलाव कर स्कूलों में दूध की जगह मोटा अनाज देने की घोषणा कर दी लेकिन बाद में सरकार ने पाउडर दूध की ही सप्लाई शुरू कर दी।
6. मोबाइल पर प्रतिबंध :
शिक्षा विभाग ने 4 मई को सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के मोबाइल रखने पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी कर किए कि लेकिन इस पर शिक्षकों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विरोध प्रदर्शित किया। इसके बाद कुछ शर्तों के साथ शिक्षकों को विद्यालय में मोबाइल रखने की अनुमति के आदेश जारी कर दिए।
7. सेटअप परिवर्तन 6 (3) का आदेश :
गत 17 मई को विभाग ने पंचायती राज शिक्षकों की 6 (3) कर उनके सेटअप परिवर्तन का कार्यक्रम जारी किया। इसे लेकर शिक्षकों का विरोध सामने आने पर इसे वापस ले लिया गया।
8. तबादला आदेश :
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने मंगलवार को 40 प्राचार्य, 8 तृतीय श्रेणी शिक्षक व पांच प्रथम श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण आदेश जारी किए, इसे कुछ देर बाद वापस ले लिया गया।
पांच साल की डीपीसी लम्बित
शिक्षा विभाग में सैकंड ग्रेड शिक्षकों की पांच साल से डीपीसी लम्बित है। इसके लिए विभाग ने सूचियां भी तैयार कर ली लेकिन एक भी शिक्षक की डीपीसी नहीं हुई है। शिक्षक संगठनों ने शिक्षा मंत्री एवं निदेशक भी अनेकों बार ज्ञापन देकर डीपीसी की मांग उठाई है।
निदेशक लगाकर हटाया
गत 6 सितम्बर को राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी की थी जिसमें माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पद पर आईएएस डॉ. महेन्द्र खड़गावत को लगाया गया था।
आईएएस आशीष मोदी का तबादला चूरू जिला कलक्टर के पद पर किया गया था। इसके अगले दिन डॉ. खड़गावत कार्यभार संभालने के लिए बीकानेर पहुंचे, विभाग में स्वागत की तैयारी के आदेश जारी हो गए। इसी बीच उन्हें कार्यभार ग्रहण करने से मौखिक आदेश से रोक दिया गया था। इसके 18 दिन बाद 22 सितम्बर को डॉ. खड़गावत का तबादला शिक्षा निदेशक के पद से ब्यावर कलक्टर के पद पर किया गया।
इस प्रकार राजस्थान सरकार का शिक्षा विभाग पलटू विभाग जैसा बन जाने से शाख खोता नजर आ रहा है।
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