Monday, May 17, 2021

राजस्थान शिक्षक संघ आजाद के ज्ञापन






कोविड संक्रमण बढ़ता देख केंद्रीय बैंकों ने कई लाख करोड़ रुपए दिए, इसका ज्यादातर हिस्सा अमीरों के पास पहुंच गया।

कोविड संक्रमण बढ़ता देख केंद्रीय बैंकों ने कई लाख करोड़ रुपए दिए, इसका ज्यादातर हिस्सा अमीरों के पास पहुंच गया






एक दिन पहले कोविड संक्रमण बढ़ता देख केंद्रीय बैंकों ने कई लाख करोड़ रुपए दिए, इसका ज्यादातर हिस्सा अमीरों के पास पहुंच गया|देश

कैसे दुनिया के सुपर-रिच ने कोविड काल में नकद को सोख लिया, इससे दुनिया में अरबपति बढ़े

पिछले दो दशकों में अरबपतियों की वैश्विक आबादी पांच गुना से अधिक बढ़ी है और सबसे बड़ी संपत्ति 100 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी है। रोमांच के लिए नहीं, बल्कि एक चेतावनी के संकेत के तौर पर मैंने इस दौलत पर नजर रखी। जैसे-जैसे कोविड संक्रमण बढ़ता गया, केंद्रीय बैंकों ने 675 लाख करोड़ रुपए दुनिया की अर्थव्यवस्था में झोंक दिए, ताकि वो डूबे नहीं।

इस तथाकथित अनुदान राशि का बड़ा हिस्सा फाइनेंशियल मार्केट से होते हुए ऐसे लोगों के पास पहुंचा, जो अप्रत्याशित तौर पर अमीर हैं। एक साल के अंदर दुनिया के अरबपतियों की कुल सम्पन्नता 375 लाख करोड़ से बढ़कर 975 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। 2021 की फोर्ब्स लिस्ट के अनुसार, 6 अप्रैल तक दुनिया के अरबपतियों की संख्या 2000 से बढ़कर 2700 पर पहुंच गई, जो अब तक की सबसे तेज बढ़त दर है।

अकेले चीन में 238 नए अरबपति जुड़ गए और उनकी कुल संख्या बढ़कर 626 हो गई। अमेरिका में ये संख्या 110 के इजाफे के साथ 724 पर पहुंची और भारत में 38 के इजाफे के साथ संख्या 140 हो गई। टेस्ला के एलोन मस्क की हैसियत 1.875 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर एक साल में ही 11.25
आंकड़े बताते हैं कि किस देश में सबसे पहले अमीरों के खिलाफ गरीबों का गुस्सा फूटेगा

मैं इन आंकड़ों को इसलिए देखता हूं क्योंकि ये बता सकते हैं कि किस देश में सबसे पहले अमीरों के खिलाफ गरीबों का गुस्सा फूटेगा। 2010 में अमेरिका के अरबपतियों की कुल संपत्ति अमेरिका के जीडीपी का 10% था जबकि भारत में ये आंकड़ा 17% था जो दुनिया में सबसे अधिक था।

ये आंकड़ा सबसे अधिक स्वीडन में है जहां एक साल में ही 31 से बढ़कर 41 अरबपति हो गए हैं। फ्रांस में भी अरबपतियों की संपत्ति जीडीपी के 11% से बढ़कर 17% हो गई है। भारत की जीडीपी का 2.7% हिस्सा मुकेश अंबानी और 1.7% गौतम अडानी के पास है।

बढ़ती असमानता में भी आक्रोश कम है
अमेरिका, यूरोप और चीन में अमीरों के प्रति आदर है। अमेरिका में रिच-टैक्स लगाने की मुहिम चालू है फिर भी जनता गेट्स, बेजोस या मस्क से खिन्न नहीं हैं। चीन, जैक मा जैसे अरबपतियों पर लगाम लगाता रहा है, फिर भी जनता को इनसे परहेज नहीं है। समस्या रूस-मैक्सिको में हो सकती है।

टॉप पर काबिज मैक्सिको में अमीरों का जीडीपी में हिस्सा 75% हो गया है। रूसी अमीरों का जीडीपी में 60% हिस्सा है। भारत तीसरे नंबर पर है। यहां जीडीपी में अमीरों का हिस्सा 20% है पर इनमें 55% की हिस्सेदारी परिवारवादी घरानों की है।

इन आंकड़ों का आधार क्या है


टॉप 10 उभरती और 10 विकसित अर्थव्यवस्थाओं का आंकड़ा मूल्यांकन के लिए लिया गया है। अरबपतियों की संपत्ति को देश के जीडीपी के साथ तुलना करने के बाद ये देखा जाता है कि किन देशों में परिवारवादी अमीरों की हिस्सेदारी ज्यादा है और कहां सेल्फमेड अरबपतियों की। भविष्य में कौन-सा देश शांत रहेगा और कहां आक्रोश आंदोलन की शक्ल लेगा। भारत में हालांकि अधिकतर अरबपति भ्रष्ट तरीके से नहीं कमाते, लेकिन फिर भी यहां की जनता में एलीट अरबपतियों के प्रति धारणा नहीं बदली है।

राजस्थान शिक्षक संघ आजाद की खबर अखबार की सुर्खियां बनीं ।



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